हमारा ये दोस्ताना
रविवार, २८ जुलाई २०१९
हमारा ये दोस्ताना
कुदरत का नजराना
ना रह सके हम एक दूजे के बीना
कैसे जी सकेंगे दोस्ती के बिना? हमारा ये दोस्ताना
साथ साथ बड़े हुए
और साथ में पढ़ भी लिए
दोस्ती का चिराग जलता ही गया
एक दूसरे का, जरिया बन गया। हमारा ये दोस्ताना
खून के रिश्ते से भी बढ़कर
बोलता है सर चढ़कर
मर मिटेंगे एक दूसरे के लिए
ज़िंदा रहेंगे साथ निभाने के लिए। हमारा ये दोस्ताना
जज्बा -इ-जहाज चलता रहेगा
नए सपने बसाता रहेगा
नदी का जल जैसे, दूषित नहीं होता
वैसे दोस्तीका चिरागा जलता रहेगा। हमारा ये दोस्ताना
हो गया है ये अटूट बंधन
उसका मोल नहीं कर सकता कोई धन
सब से परे और सब से अनोखा
हम मिल के रहेंगे सदा सखा।
हसमुख मेहता
हो गया है ये अटूट बंधन उसका मोल नहीं कर सकता कोई धन सब से परे और सब से अनोखा हम मिल के रहेंगे सदा सखा। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal
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Very beautiful poem, dear Sir! Spenser's, " My verse your virtues rare shall eternise, And in the heavens write your glorious name" likewise the poet has eternized their friendship writing this poem. I really enjoyed the poem.