हरकत
गुरूवार, २२ अगस्त २०१९
इतना भी ना सताना
मुझे पागल ना बनाना
दरदर ना भटकाना
हरकत कभी ना करना बचकाना।
हम ने तो सिर्फ चाहा है
और बारबार कहा है
कभी दिल से नहीं निकाल पाएंगे
जान दे देंगे पर पीछे नहीं हटेंगे।
रही मन ही मन दबी भावना
ना करना उसकी अवगणना
दिल से उठी ये एक आवाज है
आप तक पहुचानेका मिजाज है।
आप इन्कार कर सकते है
जूते लगवा सकते है
सरेआम बदनामी कर सकते है
और चाहो तो गुमनामी में धकेल सकते है।
नही भुला पाओगे
और आसानी से कह पाओगे
प्यार इतना भी गिरा हुआ नहीं
बदनाम करने का कोई भी प्रयास सफल नहीं।
हसमुख मेहता
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रही मन ही मन दबी भावना ना करना उसकी अवगणना...You have said here everything very rightly and excellently. This poem is very beautiful and motivational really...10