हसता रहे... Hasta Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

हसता रहे... Hasta

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हसता रहे
रविवार, १२ जुलाई २०२०

हसता रहे तुम्हारा मुख
ना रहे कीसी बात की भूख
मिले संसार का सारा सुख
करो जीवनवहन ओर गौरविन्त करो अपनी कुख।

संसार में सब चाहा नहीं मिलता
सज्जन को दुर्जन मिलता
दुर्जन सारा सुख भोगता
सज्जना चिल्लाता और बिलखता रहता।

हमने बहुत कुछ चाहा
नहीं मिला तो हार को नहीं माना
स्वयं दिल से समझौता कर लिया
जो मिला उसे प्रसाद समझकर खा लिया।

हमने प्यार का मूल्य समझा
दिल के तत्वज्ञान को परखा
दिल उसी से मिलते है
जिसे प्रभु मिलाना चाहते है।

जीवन में रूखापन नहीं आना चाहिए
पतझड़ में भी बहार आनी चाहिए
वरखारानी रूठ गई है तो क्या हुआ?
गंगा का पानी सदा बहना चाहिए।

मिलन में यदि सुख की अनुभूति है
तो बिछड़ने मे भी सहानिभूति है
सब को मनोवांछित फल मिले
जब भी मिले, गले लगाकर बोले।

हसमुख मेहता

हसता रहे... Hasta
Saturday, July 11, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 11 July 2020

Always we should be happy and keep smiling. This poem is very interestingly and excellently penned.

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मिलन में यदि सुख की अनुभूति है तो बिछड़ने मे भी सहानिभूति है सब को मनोवांछित फल मिले जब भी मिले, गले लगाकर बोले। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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