हवा हो गया
सोमवार, २ सितम्बर २०१९
खुद को ही देखकर आईने में
खो गए मनसूबे पानी में
चक्कर खा गए मेरे विचार
सोचने लगा क्या हो इसका उपचार?
कैसे ये सब हो गया?
सपना सुहाना हवा हो गया
कैसे थी मेरी शक्ल?
अब आ गए ठिकाने मेरी अक्ल
बड़ा गुमान था अपनेपर
धोखा दे गया समय आजानेपर
क्या जीवन का भी यही अंजाम होगा?
पल भर में समाप्त भी हो जाएगा।
ना रख अपने पर इतना गुरुर
एक दिन हो जाएगा धराशायी जरूर
जो आया है उसे नष्ट होना है
फिर दिल में कष्ट काहे होना है?
जीवन का है ये बहुमुला फलसफा!
करना कभी उसे दिल से दफा
पलभर का है ये सपना
टूटेगा और कोई ना लगेगा अपना।
आईना तो सच ही बोलेगा
जीवन के राज सब खोलेगा
दिल के द्वार भी खुल जाएँगे
सब की सान ठिकाने लाएंगे
हसमुख मेहता
welcome s r chandrslekha 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
आईना तो सच ही बोलेगा जीवन के राज सब खोलेगा दिल के द्वार भी खुल जाएँगे सब की सान ठिकाने लाएंगे हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal
How all these things happened, this is difficult to know. A brilliant poem is excellently penned.10
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I would like to translate this poem
S.r. Chandrslekha Thanks dear poet Hasmukh Mehta Sir for such a wonderful write. 1 Hide or report this Like · Reply · 1w