Ibadat (Prayer) Poem by C. P. Sharma

Ibadat (Prayer)

ईबादत

जबयेदुनियाबनी
सिर्फ प्यारकाबीज़बोया
फिरभीइंसांरहता
क्योंखोया खोया?

कहाँसेआई
नफ़रत कीखरपत
जिसनेफैलाई
ये दुनियामेंगुर्बत

उखाड़फेंकोइसे
अपनेदिलोंसे
जीवोऔर जीनेदो
सबकोख़ुशीसे

उखाड़फेंको
येशैतान कीचाल
इसमेंछुपा
दुनियाकामहा काल

नफ़रत कोछोड़ो
मतबम्ब फोड़ो
भाई भाई का नाता
फिरसेजोड़ो

ये ज़िन्दगीहीज़न्नत है
प्यार, प्यार, और प्यार ही ईबादत है

Ibadat (Prayer)
Friday, February 16, 2018
Topic(s) of this poem: brotherhood
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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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