जीवन एक सफर... Jivan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जीवन एक सफर... Jivan

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जीवन एक सफर
रविवार, १८ नवंबर २०१८

जीवन एक सफर
मिल जाते है कितने ही मुसाफिर
नहीं मिलते दुबार फिर कभी भी
यादें छोड़ जाते है मन पर भी।

पता नहीं क्यों हमारा दिल खिंच जाता?
फिर वो बारबार पटल पर आ जाता
हमारा दिल भी बातें करने को मचलता
पर हमें नहीं मिलती कोई भी सफलता.

इस सफर में काटें भी होते
और फूल भी लगते
हम हरबार रंगीन सपने संजोते
उसे साकार करने के लिए उत्सुक रहते।

जिंदगी का सफर अचानक दुसरा मोड़ ले लेता
जीवन में दुःख का बादल दिख जाता
उसकी चिंता में मनुष्य निराश हो जाता
सही, गलत का अंदाजा नहीं लगा पाता।

जीवन से हमें कोई शिकायत नहीं
हमें तो जीना भी यहीं और मरना भी यहीं
जीवन के नाजुक पल में साथ निभाना
परायों को भी जीवन बसाकर अपनाना।

हसमुख मेहता

जीवन एक सफर... Jivan
Sunday, November 18, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 18 November 2018

जीवन से हमें कोई शिकायत नहीं हमें तो जीना भी यहीं और मरना भी यहीं जीवन के नाजुक पल में साथ निभाना परायों को भी जीवन में बसाकर अपनाना। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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