दिल में खमीरी...Khamiri Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

दिल में खमीरी...Khamiri

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दिल में खमीरी
रविवार, २१ जून २०२०

कौन हो सकता है धनी?
जिसकी हो सुशिल पत्नी
सुन्दर बच्चे और शांत वातावरण
बस मानो मिल ग़या स्वर्ग का अनावरण।

दिल में खमीरी हो
कभी अमीरी की कल्पना तक ना हो!
बस अपने आपमें हो सुन्दर सपना
सुनहरा संसार हो और अपनी ही रचना।

बच्चे अपने आप में काबिल हो
दिल से संगदिल हो
अपनी क्षमता का परिचय देने हमेशा तैयार
और हमेशा रहे होशियार।

संसार में और क्या चाहिए?
बस अपने कहे का वजन होना चाहिए
समाज में थोड़ा सा रूतबा हो
भले ही वाहवाह ना हो।

ऐसा मुखिया होना गर्व की बात है
सारे जग में छोटा मुंह बड़ी बात है
पिता अपने को स्वर्ग की चोटी को महसूस करता है
अपने परिवार की उपलब्धि कोफक्र से कहता फिरता है।

दिल में खमीरी...Khamiri
Sunday, June 21, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 21 June 2020

ऐसा मुखिया होना गर्व की बात है सारे जग में छोटा मुंह बड़ी बात है पिता अपने को स्वर्ग की चोटी को महसूस करता है अपने परिवार की उपलब्धि कोफक्र से कहता फिरता है।..Father's glory is sung with much enthusiastic mind. Father's greatness we cannot forget. Every father nourishes his child and keeps hope that his child should grow.

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Rajnish Manga 21 June 2020

एक पिता या परिवार के मुखिया के हवाले से एक सुन्दर कविता. (संग = पत्थर / संगदिल = पत्थर दिल)

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ऐसा मुखिया होना गर्व की बात है सारे जग में छोटा मुंह बड़ी बात है पिता अपने को स्वर्ग की चोटी को महसूस करता है अपने परिवार की उपलब्धि कोफक्र से कहता फिरता है। Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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