खुद ही चुनना... Khud Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

खुद ही चुनना... Khud

Rating: 5.0

खुद ही चुनना
Saturday, July 11,2020
7: 14 AM

अपना मारग खुद ही चुनना
जिस से प्रभु को भी पड़े सुनना
स्वयं प्रकट होकर पड़े पूछना
बालक, क्या है तेरी अंदरूनी खेवना।

कर भला तो होगा भला
जीवन का है ये दस्तूर पुराना
आप के हाथ में है इसे अपनाना!
अपनी अच्छी आदत को नहीं है बदलना ।

जिस के जीवन की शुरुआत अच्छी
उसको लगेगी हमेशा मीठी लस्सी मीठी
मन में थोड़ी सी भी खोट है तो बन जाओगे लाचार
मन में जरूर पैदा होंगे अविचार।

दयाभाव और सहानुभूति
इसकी हमेशा होनी चाहिए अनुभूति
करुणा की तो होती है स्वयंभू स्फुरणा
आपको हमेशा मिलती रहेगी प्रेरणा।

जीवन हमेशा रहेगा मधुर
जिंदगी का हर पहलु लगेगा सुमधुर
ना रहो किसीका लेने के लिए आतुर!
वो चीज़ आपको सताएगी और रखेगी चिंतातुर।

न समजो इसे अपनी दुर्बलता
ये तो प्रतिष्ठ होती है आपकी सज्जनता
इसी में छिपी हुई है महानता
और दर्शन देती है मानवता।

हसमुख मेहता
साभार: अशोककुमार

खुद ही चुनना... Khud
Saturday, July 11, 2020
Topic(s) of this poem: july,poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 11 July 2020

" न समजो इसे अपनी दुर्बलता ये तो प्रतिष्ठ होती है आपकी सज्जनता.." This poem is very brilliantly and excellently penned.

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ASHOK KUMAR VERMA 9: 06 AM (1 hour ago) to me Good morning dear sir Thanks for your beautiful poem recitation. May God bless you good health wealth and prosperity forever. Yours sincerely ASHOK KUMAR PRINCIPAL

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S.R Chandralekha Jul 11,2020,8: 03 PM (10 hours ago) to me Very nice

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न समजो इसे अपनी दुर्बलता ये तो प्रतिष्ठ होती है आपकी सज्जनता इसी में छिपी हुई है महानता और दर्शन देती है मानवता। हसमुख मेहता साभार: अशोककुमार

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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