जब मेरी प्रेयसी कसम खा कर कहती है कि वह 'सच्चाई की मूरत है'
मैं उस पर विश्वास करता हूँ, हालाँकि मैं जानता हूँ कि वह झूठ बोल रही है,
उसे ऐसा लगता है कि मैं कोई अनपढ़ युवा हूँ,
इस दुनिया की झूठी बारीकियों से अनजान।
उसका ऐसा सोचना व्यर्थ है कि अभी भी मैं जवान हूँ,
हालाँकि वह जानती है कि मेरी जवानी सबसे अच्छी बीती,
मैं तो बस उसकी झूठी-बोलने वाली जीभ को श्रेय देता हूँ;
इस प्रकार दोनों ओर से सरल सत्य को दबा दिया जाता है।
उसका यह कहना कि वह अन्यायी नहीं है?
और मेरा ये न कह पाना कि मैं बूढ़ा हूं?
ये प्रेम की सबसे अच्छी आदत प्रतीत होने वाले विश्वास में है,
और प्यार में उम्र, साल कभी नहीं देखते ।
वह मुझसे झूठ कहती है और मैं उससे,
और हम अपने दोषों में झूठ बोलकर चापलूसी करते हैं।
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Bahut Badiya Anuvad kiya hai aapne.