माँ तू ही तो थी
गुरूवार, २८ मई २०२०
माँ, तू ही तो थी
मेरी जननी केहलाती थी
मेरी भाग्यविधाता और धात्री
फिर भी तू कहलाई एक अबला स्त्री। माँ तू ही तो थी
तू दूध पिलाती थी
सारे संसार का सुख दिलाती थी
कभी अपने बारे में नहीं सोचती थी
मेरे सुख के लिए अपने को कुर्बान कर देती थी। माँ तू ही तो थी
ना जाने कितने सपने संजोए
नींद में सोए सोए
अपने आप को कष्ट मे डाले हुए
सारी सारी राते जागते हुए। माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
मेरा बचपन तेरे साथ बिता
पता नहीं कितनी झेली तूने पीड़ा
मेरे को खिलाया और खुद भूखी रही
अपनी पीड़ा खुद ही सेहती रही। माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
मेरा यौवन तेरा बड़प्पन
फिर भी नहीं गया बचपन
तेरा सहनशील स्वभाव और अपनापन
मुझे देता गया भाव समर्पण। माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
तेरे क़दमों में मेरा स्वर्ग
तूने ही तो दिया प्रेम का अर्क
मुझे नहीं बनाना है उसे नर्क
मैंने कभी नहीं सुनना दुसरा तर्क।माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
आज तू नहीं तेरी यादें है
मैंने दिए हुए सिर्फ वादें है
मुझेनहीं मालुम मे कितना सुखी रख पाया
पर तूने हमेशा मुझे प्रेम से सुलाया।माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
माँ तुझे मेरा सलाम
मेरा किया काम तमाम
आज जो भी कुछ है तेरी बदौलत
नहींकर सकतीबराबरी कोई भी दौलत।माँ तू ही तो थी, तू ही तो थी
हसमुख मेहता
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