मेरा विश्वास...Mera Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मेरा विश्वास...Mera

मेरा विश्वास
शनिवार, २६ दिसम्बर २०२०

वाह री किस्मत
लूट ली तूने मेरी अस्मत
ना खेल कोई रमत
तुझे तो आ रही होगी गम्मत।

हमने भी ली है ठान
में ली हाथ में कमान
अब तो हो गई है लड़ाई सन्मान की
शानो-शौकत और मान की।

तू लगा ले जोर
और मचा ले शोर
मैंने पहुंचना है उस छोर
हाथ में ले रखी है अपनी डोर।

काम खराब करना तेरा काम
पर में कर लूंगा काम तमाम
रखी है हाथ में, मैंने अपनी लगाम
लगा ले जोर एड़ी और चोटी का रख के हाम।

ये नहीं है बुद्धिमता
तू नहीं है करता-धरता
तेरा पड़ा है मेरे से वास्ता
में नही लगने वाला, तेरे हाथ इतना सस्ता

में इतनी जल्दी हार नहीं माननेवाला
नाही में धोखे मे आनेवाला
सामने से तू हरा नहीं सकता
पीछे से तू वार नहीं कर सकता।

फेंक अपने सारे हथियार नीचे
में विफल करूंगा तेरे प्रयास समूचे
मान जा और पीछे पाँव लौट जा
मेरे मन की स्वस्थता का लोहा मान जा।

में इतना नहीं बदकिस्मत
भले ही रूठी हो किस्मत
मेरा द्रढ़ विश्वास है और मत
नहीं गिरा सकता कोई एक भी पत।

डॉ जाड़ीआ हसमुख

मेरा विश्वास...Mera
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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