मेरा प्रेम
शनिवार, ११ दिसंबर २०२१
प्रेम ना करीओ कोई
प्रेम टूटे दुःख होइ
'हसमुख ' कहे सुनलो मुझे कोई
प्रेम में कदी ना हो बेवफाई।
राम रहीम
रटो मन ही मन
दिन लगे सुखभावन
मजो लागे तन ही तन।
कल्पना कीजो
पर स्पर्श ना होजो
सुंदरता के बीज मन में बोजो
कल्पनातीत सुख मन ही मन होजो।
आ जाए मलिनता मन
पर स्पर्श ना कीजो तन
छीने जाओगे मन को चेन
तन मन सब रहेगा बेचेन।
मन ही मेलो
पर सच को झेलो
पावनता से उसको धोलो
ना मिले राह तो, हरी हरी बोलो
डगर गीली
राह भी सुनी
करो ना बाते अनसुनी
हो जाएगी अनहोनी।
प्यार रहेगा अधूरा
यदि छोड़ दी धूरा
मन रहा मनचला
ये तू किधर की और चला?
मेरा मन अधीर और चंचल
बारबार पकडू तेरा आँचल
मेरा प्रेम शाष्वत और अमर
जीवन में मिल जाए अगर।
डॉ.हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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