मेरा काम चलना
रविवार, ७ जून २०२०
मेरा काम तो है बस चलना
ना की किसी को छलना
हम तो ठहरे सपेरे
बस इंसान के जहर को उतारते फिरे।
मेरी दृष्टि से वो ओझल रहते है
हम उन्हें चंचल कहते है
वो मार भी दे तो उनके कोई कुछ नहीं कहता!
हम आँख भी मिला दे तो कातिल का बिरुद मिल जाता।
कुछ भी होहम इंसानियत के है पुजारी
हरदम रहती है इन्तेजारी
कोई आ के हमें भी दो शब्द कह दे
हमारी तड़पती रूह कोशांति दे दे।
कारवाँ गुजरते जाएंगे
हम भी जनम लेते जाएंगे
बस निशाँ पीछे छोड़ते जाएंगे
एक ही राग को बारबार सुनाते जाएंगे।
इंसान और इंसानियत
बस साफ़ हो नियत
अपने विचारों को रखे नियंत्रित
वो कभी नहीं करेगी हमें चिंतित
हसमुख मेहता
साभार: अशोक कुमार
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कारवाँ गुजरते जाएंगे हम भी जनम लेते जाएंगे बस निशाँ पीछे छोड़ते जाएंगे एक ही राग को बारबार सुनाते जाएंगे। इंसान और इंसानियत बस साफ़ हो नियत अपने विचारों को रखे नियंत्रित वो कभी नहीं करेगी हमें चिंतित हसमुख मेहता साभार: अशोक कुमार