मेरी बच्ची -निर्भया... Meri Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मेरी बच्ची -निर्भया... Meri

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मेरी बच्ची -निर्भया
शुक्रवार, २० मार्च २०२०

मुझे मलान है मेरी बच्ची को नहीं बचा पाई
सब जगह मैंने गुहार लगाईं
आखिर में लड़त ने असर दिखाया
पुरे देश को न्यायपालिका ने भरोसा दिलाया।

आज पूरा देश ख़ुशी मना रहा
निर्भया के दोषियों को लटकना पड़ा
आखिर सांस तक दाव-पेंच चलते रहे
हर दांव उनके निष्फल होते रहे।

में हर पल मरती रही
बच्ची हरदम याद आती रही
कोई माँ ऐसी यातना ना सहे
घुटघुट कर अपने मन में मरती रहे

पूरा देश मुझे ढाढस बंधाता रहा
देश की न्यायपालिका में भरोसा रखने को कहा
कई बार मेरे को निराशा हुए
पर मेरे पाँव आगे ही बढ़ते गए।

एक बात मुझे बार-बार सताती रही
न्यायपालिका उनको हर बार मौक़ा देती रही
ऐसी सुविधा देश के हर नागरिक को क्यों नहीं मिलती?
जो देश के कानून को मान्यता देती।

आज की सुबह देश की हर बच्चियों के नाम
कोई नहीं भुगतेगी सजा गुमनाम
देश में एक सन्देश जरूर जाएगा
ऐसा जुल्म करने से हरगिज़ दो बार सोचेगा।

मेरा किस्सा यहीं नहीं ख़त्म हुआ
हम करेंगे दूसरों के लिए काम दुगुना
मेरी बच्ची तो वापस नहीं आएगी
पर बाकी बच्चियां सुकून से घूम पाएगी।

हसमुख मेहता
सादर प्रणाम: आशा देवी

मेरी बच्ची -निर्भया... Meri
Thursday, March 19, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 21 March 2020

Sushma Chandyok 2 mutual friends Message Message Chandan Deka 49 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 21 March 2020

Dipak Pradhan 3 mutual friends Message 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 21 March 2020

Chandan Deka 49 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 19 March 2020

मेरा किस्सा यहीं नहीं ख़त्म हुआ हम करेंगे दूसरों के लिए काम दुगुना मेरी बच्ची तो वापस नहीं आएगी पर बाकी बच्चियां सुकून से घूम पाएगी। हसमुख मेहता सादर प्रणाम: आशा देवी

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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