मेरी हसी
शुक्रवार, ३ अप्रैल २०२०
मे मंद मंद हसी
और चल पड़ी
नहीं सोचा उसका प्रभाव
बस चेहरेपर ला दिए भाव।
हंसना और हंसाना
बाद दिखाना दिल का अफ़साना
एक पल भी नहीं गंवाना
और मन को मनाना।
जो हसा दिल से
वो फसा मन से
नहीं किया गीला किसी से
जीत लिया दिल थोड़ी सी हसी से।
ख़ुशी को हलके से लेना
फिर उसपर ठहाका लगाना
बार-बार उसपर एतराज करना
हसी को अलग रूप में देखना।
मेरी मुस्कुराहट का लुप्त हो जाना
मेरे दिल का ना संतृप्त होना
मेरे चेहरेपर ग्लानि का भाव आ जाना
यही कारण रहे मुस्करहट के गायब हो जाना।
पर में अडिग रही हूँ
मानती हूँ की सही कर रही हूँ
मुस्कराहट के पीछे एक सन्देश होगा।
मेरा हंसना और गुनगुनाना कारगर साबित होगा।
हसमुख मेहता
S. R Chandralekha Wonderful write 👏👏 Thanks dear poet Hasmukh Mehta Sir for sharing with me 🙏🙏🙏 Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta welcome s r chandrslekha 1 Edit or delete this Like · Reply
पर में अडिग रही हूँ मानती हूँ की सही कर रही हूँ मुस्कराहट के पीछे एक सन्देश होगा। मेरा हंसना और गुनगुनाना कारगर साबित होगा। हसमुख मेहता Courtesy: S.R.Chandrslekha
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