मेरीसोच
गुरुकवार, ३० अप्रैल २०२०
मेरी सोच को कोई बंधन नहीं
में निर्धन हूँ पर धन की कोई कमी नहीं
में निराधार हू पर आधार पर निर्भित नहीं
नही कोइ सरहद पर जान सिमित नहीं।
में क्यों सौचु कोई दुखी रहे
मेरे चाहने से कोई सुखी होवे
जिनके भाग में लिखा है
उसका लेखा-जोगा होता रहे।
मेरी कायरता की कोई सीमा नहीं
पर उदारता की कोई मर्यादा नहीं
जो है मेरे पास वो बँटता रहे
किसी की आशा का तारा ना टूटता रहे।
ना था वो कभी मेरा
ना देता रहेगा साथ हमारा
आज जो मेरे पास है
"ना रहे सदा " उसकी भी कोई आस है।
जगत में सब धनि हो जावे
तो दुःख कदी नजदीक ना आवे
पर मन से कोई भीख माँगता रहे
वो जिंदगी में तरसता रहे।
ना सुखका कोई जतन
ना दुःख का कोई बँधन
ना मिले दोनों तो कोई गम नहीं
मिल जाए दोनों तो समागम यही।
हसमुख मेहता
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ना सुख का कोई जतन ना दुःख का कोई बँधन ना मिले दोनों तो कोई गम नहीं मिल जाए दोनों तो समागम यही। हसमुख मेहता