मेरी अंतिम इच्छा.. Meri Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मेरी अंतिम इच्छा.. Meri

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मेरी अंतिम इच्छा
मंगलवार, ७ जुलाई २०२०

बिना कोई शोर -शराबा
बिना कोई खाना-खराबा
बिना कोई हाय-तोबा
मुझे दफना देना।

जब में धरती से बीदा ले जाऊं
जब में ताबूत मे रखा जाऊं
कोई आंसू ना बहाए
कोई मन में दुःख ना लाए।

मेरा जीवन रहा समर्पित
में हमेशा रहा अर्पित
अपितु में ज्यादा नहीं कर पाया
पर सदा दोस्तों के बिच ही पाया।

किताबे रही सदा मेरी साथी
जीवन संगी और संगाथी
सदा रुलाती और हंसाती
फिर प्यार बरसाती।

मे जीवनी नहीं लिख पाया
पर सदा ही सुख पाया
जीवन के मूल्यों को मैंने सदा अपनाया
अपने साथियो को कभी भी नाराज नहीं किया।

मे पीछे कुछ नहीं छोड़े जा रहा
बस थोड़ी सी किताबे औरयादें दे रहा
काम आती हो तो रख लेना
या फिर किसी ग्रंथालय में दान दे देना।

हसमुख मेहता

मेरी अंतिम इच्छा.. Meri
Tuesday, July 7, 2020
Topic(s) of this poem: poem
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मे पीछे कुछ नहीं छोड़े जा रहा बस थोड़ी सी किताबे औरयादें दे रहा काम आती हो तो रख लेना या फिर किसी ग्रंथालय में दान दे देना। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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