मिलती रहे... Milti Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मिलती रहे... Milti

Rating: 5.0

मिलती रहे
सोमवार, १२ अगस्त २०१९

मिलती रहे निगाहें
हम भरते रहे आहें
मन की बात किस से कहें
दिल की बात दिल में ही रहें।

अजीब है ये दास्ताँ
फिर भी रहे हम मस्तान
दुखी कितना होता है इंसान
प्रेम कभी ना होता मेहरबान।

प्यार तो है कुदरत का अजूबा
हो जाता है मौसम भी खुशनुमा
हर डाली पर खिलते है फूल
प्रेमिजोड़े भी हो जाते मशगूल।

जीवन का है ये फलसफा
कुदरत भी नहीं होती खफा
मिलती रहती है खुदा से दुआ
प्यार का अनुभव सबको हुआ।

रहे सब के दिल में प्यार
उनमें बढ़ते रहे प्यार के आसार
यूँही बढ़ती रहे सब में यारी
कभी ना जीवन में आए लाचारी।

हसमुख मेहता

मिलती रहे... Milti
Monday, August 12, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Aniruddha Pathak 12 August 2019

A lovely piece in Hindi on love and life, simple but powerful diction. And I liked this stanza all the more प्यार तो है कुदरत का अजूबा हो जाता है मौसम भी खुशनुमा हर डाली पर खिलते है फूल प्रेमिजोड़े भी हो जाते मशगूल।

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Mehta Hasmukh Amathalal 12 August 2019

रहे सब के दिल में प्यार उनमें बढ़ते रहे प्यार के आसार यूँही बढ़ती रहे सब में यारी कभी ना जीवन में आए लाचारी। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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