मिठास
मंगलवार, ३० जून २०२०
मर्द नामर्दी दिखाया नहीं करते
सैनिक कभी पीछेहठ नहीं किया करते
देश के लिए बलिदान ही श्रेष्ठ मार्ग है
उनके लिए तो वो ही स्वर्ग है।
रिश्ते यूँ ही नहीं तोड़े जाते
उसके बांधने में सालों लग जाते
फिर भी असमंज़स में रह जाते
हर घूंट को फुंकफुंककर पिते ओर पिलाते ।
रिश्ते की डोर ही ऐसी है
जन्म मरण की रस्सी है
हम बंधे रहते है एक सूत्र में
बस एक ही तमन्ना रहती सच्चाई के मन्त्र में।
प्यार ऐसा जताओ की कोई कसर ना रहे
सामने वाले के मन में कोई संशय ना रहे
वो ऐसी डोर है जो पलभर में मिठास ख़त्म कर दे
बना बनाया कान एक ही क्षण में तमाम कर दे।
रिश्ते बनाते है आपको फ़रिश्ते
लोग नहीं थकते वाहवाही करते
जबान के एक लब्ज के लिए मरमिट ते
कुर्बान हो जाते पर लकीर नहीं लांघते।
रिश्ते ही ईमान और रिश्ते ही धर्म
बाकी जैसे भी करते रहो कर्म
जरूर से समझा करो उसका मर्म
रिश्ते में रहेगी मिठास और एहसास होगा गर्म।
हसमुख मेहता
रिश्ते ही ईमान और रिश्ते ही धर्म बाकी जैसे भी करते रहो कर्म जरूर से समझा करो उसका मर्म रिश्ते में रहेगी मिठास और एहसास होगा गर्म। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal
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Bahut khoob. Bahut khoob. Dil khush ho gya Jo apne ke liye Rishte bana dete hai farishte Rishte hote he hi aise Kaha se kaha pahucha dete hai Bus ek door ke dam pe. Dil khush ho gaya aapki kavita se.