मुस्कुराहट.. Muskurahat Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मुस्कुराहट.. Muskurahat

मुस्कुराहट
रविवार, ३० दिसम्बर २०१८

हर चीज का एक समय मुकर्रर है
हम सभी उसी के शुक्र गुजार है
हम मानते है सभी के लिए रेखाए खींची हुई है
आप उसी में एक श्री लेखा है।

जीवन मे मुस्कुराहाट की वजह होती है
कुछ चीजें कलह पैदा करती है
पर श्री श्री एक श्रोत बनी रहती है
जिसकी हर बात काबिले तारीफ होती है।

कितनी बड़ी बात आपने कह दी है
करत-धरता तो उपरवाला ही है
आप खुद ही सुख का एक जरिया है
दिल आपका एक विशाल दरिया है।

हम "हसमुख " है जैसा की हमारा नाम है
तो आप श्री लेखा है
जो सुख की रेखा खींचती है
और ऐसा सोचती भी है।

किसी के सूख का कारण बनना भी एक सौभाग्य है
ऐसे दोस्त मिलना भी अपना अपना भाग्य है
आप मिले, हम मिले बस यूँही मिलते रहे
अपनी अपनी ख़ुशी को अपनी तरफ से स्वीकारते रहें।

जिंदगी वैसे भी तो दुश्वार होती है
हर किसी के लिए एक पैगाम लाती है
जिसने भी उसे प्यार से अपना लिया
मानो उसने भवसागर को तैर लिया

हसमुख मेहता

मुस्कुराहट.. Muskurahat
Saturday, December 29, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2019

Shreelekha Mistry Thank you very mach🙏 1 Hide this Like · Reply · 5d

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Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2019

hasmukh mehta///// welcome always 1 Edit or delete this Like · Reply · 5d · Edited

1 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 29 December 2018

जिंदगी वैसे भी तो दुश्वार होती है हर किसी के लिए एक पैगाम लाती है जिसने भी उसे प्यार से अपना लिया मानो उसने भवसागर को तैर लिया हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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