मेरी माँ/ My Mother Poem by Varsha M

मेरी माँ/ My Mother

Rating: 5.0

मेरी माँ
प्यारी माँ
थकती नहीं कभी
बस करती ही जाती
सेवा हमारी।

हो सकते हैं हम कमज़ोर
मगर उसका हौसला
घटता नहीं कभी
और उसका उम्मीद का दिया
बुझता नहीं कभी।

न जाने कहा से जुटाती
हिम्मत इतना सारा की
सूरज भी घुटने टेक दे
अगर वो आजाये आपने पे
फिर वो सुनती किसीकी भी नाही।

माँ होती ही है ऐसी
जो कर गुज़रती वो सब कुछ
आपने बच्चोन के वास्ते
चाहे उससे आपने पीट भी क्यों न काटना पड़े
कदम लड़खड़ाते नहीं उसमे भी उसके एक्दम्।

मेरी माँ/ My Mother
Monday, December 14, 2020
Topic(s) of this poem: mother
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
This is my first trial writing in devnagri script. Enjoying it very much.

Photo courtesy Jimmy Dean on unsplash.
COMMENTS OF THE POEM
Sharad Bhatia 15 December 2020

" माँ" के प्रति एक बहुत बेहतरीन हिन्दी रचना आज हम सब आपको आपके द्वारा पहली बहुत प्यारी कविता " माँ" के लिए बहुत - बहुत आभार व्यक्त करते हैं और आशा करते हैं आगे भी इसी तरह हम सब ऐसी मंत्रमुग्ध करने वाली रचनाओं का आनंद प्राप्त करते रहेगे।। क्या शब्द लिखूँ" माँ" के प्रति " माँ" ने मुझे लिखा।। 10000******

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Rajnish Manga 14 December 2020

बहुत बहुत बधाई, वर्षा जी. मुझे आश्चर्यमिश्रित प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है. हिंदी कविता को देवनागरी लिपि में लिखने का सुख व संतुष्टि अलग ही है जिसे आपने ऐसे व्यक्त किया है 'Enjoying it very much' जो सर्वथा उचित है. संसार की सब माओं को समर्पित इस अद्वितीय कविता के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद.

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