ना पूछो...Na Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

ना पूछो...Na

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ना पूछो
बुधवार, २७ नवम्बर २०१९

ना पूछो क्या हुआ?
बस प्यार का एहसास हुआ
दिल में टीस महसूस हुई
पर आशा मायूस नहीं हुई।

नहीं हुआ पहले कभी
बस शुरू ही हुआ अभी
में देखता ही रहा
सुखद सा हादसा रहा।

सब कहते है
प्यार के लक्षण यहां ही दीखते है
एक खूबसूरत सी जगा
मानो प्यार झगमगा उठा।

पता नहीं कब क्या हो जाए?
रिश्तो में दरार आ जाए
दिल को ये बात नहीं भाये
रेहरहकर भीतर का डर सताये।

कितने ही गायब हो गए
अपना निशान भी नहीं छोड़ गए
कोई ठिकाना नहीं कोई संदेशा भी नहीं
बस अंदेशा हीअंदेशा बचता यहीं।

हसमुख अमथालाल मेहता

ना पूछो...Na
Friday, November 29, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 29 November 2019

पता नहीं कब क्या हो जाए? रिश्तो में दरार आ जाए दिल को ये बात नहीं भाये रेहरहकर भीतर का डर सताये।....so touching and true. Beautiful poem. Thanks for sharing.

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 29 November 2019

कितने ही गायब हो गए अपना निशान भी नहीं छोड़ गए कोई ठिकाना नहीं कोई संदेशा भी नहीं बस अंदेशा हीअंदेशा बचता यहीं। हसमुख अमथालाल मेहता Hasmukh Amathalal

0 0 Reply
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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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