नहीं बदली... Nahi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

नहीं बदली... Nahi

नहीं बदली
मंगलवार, १ जनवरी 2019

कुछ चीजे नहीं बदल रही
आसमाननहीं बदल रहा
सूरज भी वहां का वहीँ रहा
तारे भी वहीँ और चन्दा भो वो ही रहा

धरती पर मानवबदला
मानव का स्वभाव बदला
उसकी नियत बदली
उसकी चाल भी बदली।

दोस्त बदले है कईबार
बस माँ- बाप का वो ही रहा प्यार
बच्चे रहे उनकी आँखों के तारे
बस जीना चाहा उनके सहारे।

में एक ही चीज चाहूँ
बस रिश्ता निभाना चाहूँ
कितनीभी मुसीबतें क्यों न आए!
बस मेरा मन ना डगमगा पाए।

नया साल आपको दुगुनी खुशियां दे
आपकी उम्मीदों को नै ऊंचाइयां दे
हमारी डोर बंधी रहे
दोस्त रहे भले सम्बन्धी ना बनकर रहें।

हसमुख मेहता

नहीं बदली... Nahi
Tuesday, January 1, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
M Asim Nehal 01 January 2019

Bahut badiya..

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Mehta Hasmukh Amathalal 01 January 2019

sure we will always remain friends... ashwin khambholaja

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 01 January 2019

नया साल आपको दुगुनी खुशियां दे आपकी उम्मीदों को नै ऊंचाइयां दे हमारी डोर बंधी रहे दोस्त रहे भले सम्बन्धी ना बनकर रहें। हसमुख मेहता

0 0 Reply
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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