नई रात
सोमवार, २२ जुलाई २०१९
फिर नई कोई रात है
उसमे कोई नै बात है
ना उसमे कोई विवाद है
बस नया एक संवाद है।
रात का आना
उसकी याद को लाना
मानो एक है नया नजराना
बदल गया है ज़माना।
तारे भी टिमटिमा रहे
अपनी गरिमा को समजा रहे
दुनिया है हमारा गौसला
क्यों ना रखे हम हौसला।
प्यार की कोई सीमा नहीं
उसकी कोई परिभाषा नहीं
जो समजे उसे बड़े प्यार से
मिले गले अपने यार से।
हमारा कोई वजूद नहीं
ना चले किसी की ज़ीद यही
मिलके रहना हमारा है मकसद
हमें देना है तिरस्कार को रूखसद।
हसमुख मेहता
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हमारा कोई वजूद नहीं ना चले किसी की ज़ीद यही मिलके रहना हमारा है मकसद हमें देना है तिरस्कार को रूखसद। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal