नजर में अमी
शुक्रवार, २७ नवंबर २०२०
मुझे ले चल तू उस पार
जहाँ रहता है मेरा यार!
बीच में है गहरा समंदर
प्रेम उमड़ता मेरे अंदर।
तेरा बिना रहना संभव नहीं
मुझे इस भव में ये मंजूर नहीं
साथ ही रहना साथ ही घूमना
कभी ना करना दिल से मना।
ना चाहा मैंने अकेला सफर
ये है मेरा वचन अफर
हो जाए कितना भी उलटफेर!
रहूंगा में अडिग इस संसार।
साथ जिएँगे साथ चलेंगे
सब शपथ हम साथ में लेंगे
करते रहेंगे जिंदगी का वहन
कामना करते है साथ में हो दहन।
नहीं कोई रोक सकेगा हमें
इतना दम है और कोई किसी में!
हम छुएंगे आसमान की सतह
मिलती रहेगी हमेशा फतह।
हाथ मे मेरा हाथ तेरा हो
जीवन में ना कोई अन्धेरा हो
जीवन में सुबह नए रंग लाएगी
अपने आप में पहचानी जाएगी।
मेरा जीवन लगे सजीवन
और बना रहे आजीवन
खुशियों का भण्डार कभी ना कमी हो
मेरी नजर में सदा अमी हो।
समंदर एक छोर तू खड़ी थी
मेरी आँखे उसपार लड़ी थी
जब मुझे तू मिल गई हो
सपना जैसे जीवित कर गई हो।
डॉ जाडीआ हसमुख
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