नरक ना बन जाए।
कुसूर सिर्फ इतना ही था'
हमने तो दिल से चाहा था
उनको प्यार र्स पाना चाहा हा
बस पेह्चाना ही नहीं था।
फूल जैसा मन था हमारा
उनका प्यार बस खरा नहीं उतरा
उन्होने धीरे से उसमे जहर भर दिया
हमारा जिना दूभर कर दिया।
जहा फूल बरस ने थे
वहां कोडे बरस ने लगे
प्यार की बात तो छोडो!
घूंसों और लात की ही परख कर लो।
प्यार की आवाज अब सुनाई नहीं दे रही थी
बातो बातो में पीटी जा रही थी
खाने पिने की सुध खो दिया था
यह जीवन बस यातना सेहने के लिए ही लिया था।
आज मौका मिला है कुछ कहने का
खुल्ली हवामे सांस लेने का और उभरने का
लोग नहीं छुड़ातेतो आज हम मर ही जाते
बेरहमी से पिटा था या हमें जाते जाते।
हम कराह रहे थे लेटे लेटे
चटके भर रहे थे कीड़े और मकोड़े
हमें सुध नहीं थी बोलने की
बात भी नहीं सोच सकते थे चलने की।
खेर! पुलिस उनको ले गयी है
कोर्ट मे सुनवाई अब होनी है
फैसला चाहे जब आए
किसी का जीवन ऐसा नरक ना बन जाए।
welcome prabh singh virk Unlike · Reply · 1 · Just now
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welcome 2DrSatinder Parkash Nanda Unlike · Reply · 1 · Just now