में पगला गया.. Pagla Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

में पगला गया.. Pagla

Rating: 5.0

में पगला गया
Friday, June 26,2020
11: 04 AM

तेरा एक ही आह्वाहन
मन हो गया मेरा हनन
नहीं लगता कहीं भी मन
लगी रहती दिल में जलन।

लोग केहते है में पगला गया
भावनाओ मे बह गया
अपना दिल यूँ ही दे दिया
मन का चेन और सुख खो दिया।

प्रीत की रीत है गजब और न्यारी
लगे दिलको बहुत प्यारी
सारा जहाँ मानो कदमो में आ गया
पूरी दुनिया का सुख दे गया।

मैंने सूना है कहते "प्रेम ना करीओ कोई"
प्रेम करे से दुःख होइ
पर मुझे तो प्रेम में स्वर्ग नजर आता है
सारी दुनिया का मंझर उसी मे दिखता है

प्रेम में लगा मुझे दुनिया का भविष्य
उस से बढ़ता है सुख और आयुष्य
यदि सब ऐसा सोचे तो दुनिया पूरी बदल जाय
सुख के काले बादल आ के धरती की तरस मिटा जाय।

में वही हूँ बस मन में बस गया है कोई
ना घर अच्छा लगता है ना रसोई
आत्मा बस रहती है खोई खोई
ना हो जाय कभी वो हरजाई।

हसमुख मेहता

में पगला गया.. Pagla
Friday, June 26, 2020
Topic(s) of this poem: june,poem
COMMENTS OF THE POEM

S. R Chandralekha 173 mutual friends Message

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welcome Jonah Salvador 1 mutual friend 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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में वही हूँ बस मन में बस गया है कोई ना घर अच्छा लगता है ना रसोई आत्मा बस रहती है खोई खोई ना हो जाय कभी वो हरजाई। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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