प्रभु स्मरण
Monday, November 18,2019
8: 24 AM
प्रभु, हम मोहमाया में लिप्त
कभी नहीं होते संतृप्त
नहीं हमरा कोई स्नेही और नाही आप्त
समय आनेपर सब हो जाते लुप्त।
देह का गुमान ठीक नहीं
छेह दे जाते यही
माया के पीछे दोट
ला देती है अचानक ओट.
प्रभु स्मरण हो जाता अनिवार्य
नहीं बचता और कोई पर्याय
बढ़ती जाती हमारी वय
लगता हमें हो गया है व्यय।
वो ही देते वोही लेते
अपने उपदेश से समजाते
संसार में रह्कर भी निर्मोही बनो
सादगी रखो, उपासना करो और भलाइ करो।
भले ही मोह से भरे हो
संसार एक दुःखों से घीरे हो
पर स्मरण दिल से हो
सब के साथ तूम्हारा भी उद्धार हो।
राग, द्वेष, इर्षा कभी खत्म नहीं होंगे
उनका निवारण अपने आप ही करने होंगे
उसका नाम पावनकारी है
सुखकारी, उद्धारक और अविरत बहने वाली धारा है।
हसमुख मेहता
राग, द्वेष, इर्षा कभी खत्म नहीं होंगे उनका निवारण अपने आप ही करने होंगे उसका नाम पावनकारी है सुखकारी, उद्धारक और अविरत बहने वाली धारा है। हसमुख मेहता
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This is always great to surrender before God. He saves us from all danger. An excellent poem is beautifully penned.