राम लला Poem by Pushpa P.

राम लला

एक बड़ा तूफ़ाँ आया, जिसने कवि के मन को भरमाया
खो गए थे शब्द वो सारे जिससे कवि ने थोड़ा नाम कमाया

उदास राहें उदास मंज़िल उदास थी हर धड़कन दिल की
नीरसता से विचलित की थी जीवन की हर इच्छा को

मानो बस चल रही थी साँसे गुजर रहा था जीवन बेमानी सा
तब शायद दुखते दिल के दर्द को सुना तुमने दुनिया को बनाने वाले

जाती ख़ुशियों को वापस कर मानो सुखी धरती को हरियाली देकर सहला दिया, जाग उठा मन में सोया कवि और कविता लिखने का मन बना ही लिया

सुना था ईश्वर दयालु हैं अपने बच्चों के लिए, पर आज महसूस किया उनके अनुग्रह को हमने, आने से पहले राम लला मेरे दुख काटे तुमने, देकर कवित्व वरदान फिर से मुझको जीवन दान दिया अब शब्दों का भंडार दे ही दिया

शत शत वंदन राम लला आपको शत शत वंदन

COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success