हवाओं की बदलती दिशाएं,
और इन हवाओं की कुछ अजीब चाल।
आँखों में नम सपनों के साथ,
कभी तेज, कभी धीरे,
और कभी-कभी तो बिल्कुल शांत।
कभी पूरबा चलते-चलते,
एकाएक तेज पछुआ का लौटना—
एक गंभीरता और हड़बड़ाहट के साथ;
मानो कोई तेज तूफान से बचने के लिए,
हवाओं में अदम्य साहस भरता हो।
खेत में कुदाल चलाता किसान,
हवाओं के साथ जिसने जिया,
और मनभर जिसने हवाओं को समझा;
वह समझता है इसकी अजीब चाल—
जैसे हवाओं ने किसान के
कानों में कुछ फुसफुसाया हो।
थोड़ी घबराहट और हल्की मुस्कान के साथ,
फिर कुदाल चलाता किसान।
कुदाल की चाल का
कभी तेज तो कभी धीरे होना,
हवाओं की दिशा के साथ कुदाल का
कभी धीरे तो कभी तेज चलना।
हवाओं की नम आँखों को देख,
किसान की कुदाल का
निष्ठुर होकर बेचाल ठहरना।
बादल का सहमकर, भरभरा कर
तेज आंसू बहाना;
किसान हताश, लेकिन मुस्कुरा कर
एक नई उम्मीद, नई मुस्कान भरना—
उसे किसान बनाता है।
बादल कभी इधर तो कभी उधर,
हवाओं के संग चलने की कोशिश में;
किसान की आशा की किरणों पर,
अनजाने में कभी साथी बनता,
तो कभी ग्रहण लगाता बेचारा बादल।
मुस्कुराकर अगले मेढ़ की ओर बढ़ना,
किसान और उसकी साहसी कुदाल का—
उसे किसान और उसे कुदाल बनाता है।
मौसम का अचानक बदलना,
मौसम की यह बेहिसाब मजबूरी;
किसानों के संग चलने की
नाकाम कोशिश में,
मौसम का कभी थर्राना
और अदम्य गुर्राना।
देखकर बादल का कभी आंसू बहाना,
तो कभी मौसम की मार सहकर
आंसू का घूंट पी लेना।
देखकर किसान का थोड़ा हताश होना,
लेकिन फिर मुस्कुराना
और एक नई क्यारी की ओर बढ़ जाना;
यही अटूट हौसला उसे किसान बनाता है।
धरती की बेचैनी,
और देख उसकी बेचैनी—
किसान का हताश, निराश
और बिल्कुल बेचैन होना;
लेकिन फिर मुस्कुराकर सींचता,
बेचैनी को शांत करता,
एक खेत में काम करता मनुष्य—
उसे एक सच्चा किसान बनाता है।
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