प्रकृति का मेलजोल। Poem by ramesh rai

प्रकृति का मेलजोल।

प्रकृति का मेलजोल
बड़ा ही अदभुत है
असंख्य जीव पल रहे
प्रकृति के गोद में।।

असंख्य जीवों का आहार
प्रकृति खुद देती है
ए हवाएं ए किरणे
प्रकृति के प्रतिपालक है।।

प्रकृति के सूक्ष्म तत्व
जिसकी पहचान है बाकी
मानव भी खोया है
आडंबरों से घिरा है।।

प्रकृति अपने रंग में
रंगती है सभी को।।

Created on 22/9/2025
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@ Ramesh Rai

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