वतन हमारी शान... Shaan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

वतन हमारी शान... Shaan

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वतन हमारी शान
Wednesday, June 24,2020
8: 07 AM

हम कल भी ऐसे ही थे
आज भी वैसे ही है
आनेवाले कल भी कोई फर्क नहीं होगा
यदि हुआ तो समयजरूर वतलाएगा।

इतिहास के पन्ने वैसे ही रहेंगे
जो हुआ था उसकी साबीती देते रहेंगे
किसने से देश से गद्दारी की और खून बहाया!
कौन देशभक्त रहा और अपना बलिदान दिया।

पन्नो कोपलट के देखो
अपने अतीत में झांखो
नहीं बदलेंगे कभी भी किसी हालात में
देश हमेशा याद रखेगा अपनी किताबो में।

देश ना झुका है ना झुकेगा
आज नहीं तो कल अपनी जमीं वापस लेगा
नापाक क़दमों को वापस जाना होगा
शर्मिंदगी को महसूस करना होगा।

देश है तो हम है
हमारे में इतना दम तो है
हम रक्षा जरूर करेंगे और करते रहेंगे
देश के लिए बलिदान देते रहेंगे।

वतन हमारी शान
आन, बान, गौरव और अभिमान
भले ही हम ना हो इतने शक्तिमान
पर मर मिटेंगे शानो शौकत के साथ और स्वाभिमान।

हसमुख मेहता

वतन हमारी शान... Shaan
Wednesday, June 24, 2020
Topic(s) of this poem: june,poem
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Chandeswar Yadav 1 mutual friend Add Friend

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Narayan Sahoo 3 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 27m

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वतन हमारी शान आन, बान, गौरव और अभिमान भले ही हम ना हो इतने शक्तिमान पर मर मिटेंगे शानो शौकत के साथ और स्वाभिमान। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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