वो चेहरा
रविवार, ३० अगस्त २०२०
चेहरा वो ना छिपा सके
अपनी बात भी ना कह सके
बस आँखो से दो बून्द घिरा दिए
अपनी बात यूँही आसानी से कह गए।
हम पढ़ गए उनकी वेदना
दिल में उठ सी गई संवेदना
मन में टीस सी उठी ओर समा गई
दर्द के एहसास कोगरमा गई।
हम रोतो ना सके
दिल हल्का कर दिया शब्दों से बयान करके
गाते गए और याद करते गए
उनकी रोती सूरत को मन-मस्तिष्क में समागए।
"हमें साथ देना" मानो वो कहना चाह रहे थे
" किसी हाल मे दगा मत देना" की याचनाकर रहे थे
हमने भी मन ही मनक्षमापना कर दी
दोहाथ जोड़कर प्रभु से विनती कर दी।
धरती एकमानव समंदर है
दुरिया ओर मन-मनांतर है
इसी में किसी से दिली लगाव हो जाना बड़ी बात है
इसी को अंत तक निभाना सौभाग्य और सौगाद है।
डॉ जाडिआ हसमुख
गुरुजी सादर प्रणाम एवं सुप्रभात, इतनी बेहतरीन रचना ।। एक गहरा विषय और एक गहरी सोच वास्तव मे हम कभी - कभी सामने वाले आँसूओ के भाव को नहीं समझ पाते कि वो क्या कहना चाहते।। आपका बहुत - बहुत आभार की आपने एक बेहतरीन रचना के द्वारा हम सब का मार्गदर्शन किया।।
From: Sharad Bhatia (New Delhi India; Male; 42) To: Mehta Hasmukh Amathalal Date Time: 8/30/2020 10: 31: 00 AM (GMT -6: 00) आभार एक बार फिर से इस उम्मीद के आप इस तरह हमेशा हम सब की रचनाओं का आनंद लेते रहे और हम सब का ऐसे ही उचित मार्गदर्शन करते रहें।। आपका छोटा सा शिष्य (शरद भाटिया)
From: Sharad Bhatia (New Delhi India; Male; 42) To: Mehta Hasmukh Amathalal Date Time: 8/30/2020 10: 31: 00 AM (GMT -6: 00) Subject: Regarding ऐसा क्या हुआ गुरुजी सादर प्रणाम, आशा करता हूँ और ईश्वर से हमेशा प्रार्थना हैं कि आप हमेशा स्वस्थ रहे और हम सब ऐसे ही मार्ग दर्शन करते रहे ।। गुरुजी, आपका बहुत - बहुत आभार, कि आपने एक बार फिर मेरी छोटी सी रचना को पढ़ा और इसे सराहा ।।
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Poem: 59082264 - वो चेहरा... Vo Member: Sharad Bhatia Comment: गुरुजी सादर प्रणाम एवं सुप्रभात, इतनी बेहतरीन रचना ।। एक गहरा विषय और एक गहरी सोच वास्तव मे हम कभी - कभी सामने वाले आँसूओ के भाव को नहीं समझ पाते कि वो क्या कहना चाहते।। आपका बहुत - बहुत आभार की आपने एक बेहतरीन रचना के द्वारा हम सब का मार्गदर्शन किया।।