वो शब्द
Friday, October 2,2020
7: 37 AM
आज भी वो शब्द गूंजते है
कान में जु बनकर रेंगते है
मुझे हैरान-परेशान कर देते है
कहाँ गए वो सुनहरे शब्द।
ना मैंने कभी बुरा केहना
और किसीको प्रताड़ना
कहकर अपने आपको निचे गिराना
सब अपने आपको समजते है सयाना।
वो ज़माना और था
सत्य वचन का मायना था
आदमी का प्रतिबिम्ब और आइना था
आज ये एक बहाना है।
ना कभी मैंने बुरा सुनना है
और सुनाना है
सब से अच्छा वचन निभाना है
अपने आपकोइस दुषण से बचाना है।
अच्छा देखने में कोई बुराई नहीं
सत्य की कोई खराई नहीं
देखकर कहने में बुराई है
अपने आपको नीचे गिराना है।
आजकल ज़माना बदल गया है
पानी का बहाव दूषित हो गयाहै
मन मैला औरवचन में कटुता
कहाँ से आएगी वर्तन में नम्रता।
Dr Jadia Hasmukh
आजकल ज़माना बदल गया है पानी का बहाव दूषित हो गयाहै....Time has changed but still those word are ringing. But we have to live cleverly and peacefully hearing natural music of love and peace. An amazing poem is well penned.
मन मैला और वचन में कटुता कहाँ से आएगी वर्तन में नम्रता। Dr jadia Hasmukh
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Poem: 59301155 - वो शब्द.. Vo Member: Kumarmani Mahakul Comment: आजकल ज़माना बदल गया है पानी का बहाव दूषित हो गयाहै....Time has changed but still those word are ringing. But we have to live cleverly and peacefully hearing natural music of love and peace. An amazing poem is well penned