कुछ दिल केह जाता है,
कुछ सांसे पिरो देती है;
ना तन, ना मन, अब अपना है,
बाकी जो है वो सपना है।।
के कहे अब अपना दुखड़ा,
जो था वो आनू बन बेह गया;
कोरा कागज़, कर गया मुझे,
पल भर के झोंक में।।
ना सोचा था, जिंदगी अपनी,
ऐसी रूखी सूखी होजाएगी;
पर अब जाना है मैंने कि,
फिर से शुरू करने की कोई उम्र नहीं।।
गिर कर फिर से उठने को ही,
ज़िंदगी कहा करते हैं।।
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Wah wah kya baat hai.....पर अब जाना है मैंने कि, फिर से शुरू करने की कोई उम्र नहीं।।10****