Manish Solanki

Manish Solanki Poems

श्वेत शंखिनी चंद्रवदन ये
जननी लाख विचारों की
व्यक्त नहीं कर सकता तुझसे
मन का अंतरद्वन्द सखे।
...

करूँ वासना की उपासना,
और करूँ उसका सम्मान;
रहूँ मैं उसकी छात्र-छाया में,
हर पल उसके भक्त समान;
...

बहारें हुस्न की आयी
बारिशे इश्क लाने को,
हुआ मजबूर मन-भंवरा
हवस के गीत गाने को;
...

तेरी गली मेरी गली एक ही गली तो है,

तोड़ो चाहे दिल मुलाकात निश्चित है,
...

The Best Poem Of Manish Solanki

तेरे बिना/Tere Bina

तेरे बिना सूनी-सूनी रतियाँ गुजारी है,
खुद से ही कर-कर बतियाँ गुजारी है;
सूना है पलंग घर - बार सब सूने हैं,
सूना ये जहाँ दिन रात सब सूने हैं;
घर दफ्तर से बाजार सब सूने हैं,
सोमवार से रविवार सब सूने हैं;
मेरे घर आने तक सज-धज जाती थी,
आईने को देख शरमाती घबराती थी;
जब दरवाजे से आवाज मैं लगाता था,
दरवाजा खोलने को दौड़ी चली आती थी;
स्वागत मे मेरे होले से मुस्काने की,
नज़रें झुका के वो अदाएं शरमाने की;
कर के बहाने मेरे टाई खोलने की, फिर
बाँहों में लिपट कुछ देर रुक जाने की ……।

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