चाँदी के चमकते सितारों को
सोने पे सजाया करते थे
जब रात का आँचल आ जाए
सुबह को पुकारा करते थे
जब धुप है थक कर सो जाती
इस जगह से जाकर खो जाती
तेलों में भिगाकर दीयों को
रातो में जलाया करते थे - -
जब रात का आँचल आ जाएँ
मेरे ख्यालों मे तुम सज और
सवर कर आ जाओ
इसी उम्मीद मे हम तेरे लिए
गीतों को बनाया करते थे
Decorating light of silver with gold and shining is very much amazing in this imagery drawn with real sense. Interesting poem shared really.10
इस मधुर गीत की प्रशंसा करने के लिए उपयुक्त शब्द ढूंढना मुश्किल है. बस इतना कहूँगा कि भाषा और कथन दोनों लाजवाब हैं. कविता से ही एक उदाहरण सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ: तेलों में भिगाकर दीयों को / रातो में जलाया करते थे -/ जब रात का आँचल आ जाए / सुबह को पुकारा करते थे
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Chamak rahe hain sitare....Maza aa gaya ab toh...Ke kavita padhkar Sama Cha gaya ab toh