मेरा जीवन सदा मेरा रहा
मेरी मर्जी के मुताबिक चलता रहा
ना राग ना द्वेष
बस सब नापाक सोच को कर दिया शेष
सोचा जीवन को सार्थक कर दु!
मिटटी की खुश्बु के साथ मिला दू
उसके हर कण में समा जाऊ
स्वाभिमानता के साथ शहादत का फ़र्ज़ निभा जाऊं।
मेरा जीवन दुसरों के काम आए
जीवन समाप्त होने से पहले मुराद पूरी हो जाए
में नहीं जानता जीवन मेरा निर्मल है या मलीन
पर हमेश में रहता हूँ लीन और तल्लीन
हसमुख मेहता
में नहीं जानता जीवन मेरा निर्मल है या मलीन पर हमेश में रहता हूँ लीन और तल्लीन हसमुख मेहता
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Your life is yours and this life is precious gift given by God. This poem is very interestingly penned.10