मेरा जीवन Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मेरा जीवन

Rating: 5.0

मेरा जीवन सदा मेरा रहा
मेरी मर्जी के मुताबिक चलता रहा
ना राग ना द्वेष
बस सब नापाक सोच को कर दिया शेष

सोचा जीवन को सार्थक कर दु!
मिटटी की खुश्बु के साथ मिला दू
उसके हर कण में समा जाऊ
स्वाभिमानता के साथ शहादत का फ़र्ज़ निभा जाऊं।

मेरा जीवन दुसरों के काम आए
जीवन समाप्त होने से पहले मुराद पूरी हो जाए
में नहीं जानता जीवन मेरा निर्मल है या मलीन
पर हमेश में रहता हूँ लीन और तल्लीन

हसमुख मेहता

मेरा जीवन
Sunday, November 10, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 10 November 2019

Your life is yours and this life is precious gift given by God. This poem is very interestingly penned.10

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 10 November 2019

में नहीं जानता जीवन मेरा निर्मल है या मलीन पर हमेश में रहता हूँ लीन और तल्लीन हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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