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दोनों खिल गए और गुलज़ार हो गए

Rating: 5.0
कहीं से कुछ बीज उड़ आए बगिया में और बिखर गए
अब इंतज़ार है इन्हे बादलों का, कि कब बरसेंगे

जब उमड़ आएंगे ये फ़िज़ा में और बरस जायेंगे
तब नयी फसल उग आएगी और फूल भी खिलेंगे

मेरे सूने मन में भी कुछ बीज आ गये कहीं से
कैसे कहाँ से इन्हे धुप और हवा मिल गयी ये भी फूल हो गए

वहां खुशबू उडी हवाओं में और बिखर गयी
यहाँ दिल में खिली कलियाँ और ऑंखें चमक गयी

मौसम अचानक बदल गए ज़मीन पे और दिल में
दोनों खिल गए और गुलज़ार हो गए
Friday, March 26, 2021
Topic(s) of this poem: growth
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COMMENTS
Bahut samay ke baad ek badiya kavita/ narz padhne mili.
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Wah bhai gulzar kar diya.....
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Rajnish Manga 26 March 2021
A man's mind and brain are creative by nature but when they are nurtured in positive environment, it becomes a booster for creativity. Thanks for this Hindi marvel.
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The Road Not Taken

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4/19/2021 5:57:49 PM # 1.0.0.560