एक रिहाई के बाद Poem by M. Asim Nehal

एक रिहाई के बाद

Rating: 5.0

एक रिहाई के बाद रूह और जिस्म जुदा हो जायँगे,
जो कुछ किया इस दुनिया में वो किताब -बंद जायेंगे
फैसला होगा जब अर्श पे क़यामत के दिन
देखना उस दिन कौन गिरफ्त में होते हैं
और कितने रिहा हो जायेंगे

This is a translation of the poem Ek Rihaayi Ke Baad by M. Asim Nehal
Saturday, February 16, 2019
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