Shashikant Nishant Sharma

Rookie - 133 Points (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

एक लड़की मिली थी कल - Poem by Shashikant Nishant Sharma

एक लड़की मिली थी कल
आज यद् आ रही पलपल
कल ख्वाबों में थी समाई
आज दिल में मची है हलचल
एक लड़की...

उसकी अल्हर सी अंगराई
बन के नशा मन पे छाई
कुछ ऐसे वो शरमाई
दिल में बजी शहनाई
उसकी ही यादों में हर पल रहा है ढल
एक लड़की...

उसका गोरा बदन जैसा खिला चमन
उसका छुवन जैसे सवन में अगन
मन के पंछी को मिला गगन
दिल के मौसम में आया सावन
उसके आने से गया मन ला मौसम बदल
एक लड़की...

उसकी निगाहों में था प्यार
उसे बातों से मिले करार
उसकी पनाहों में मेले सुकून
उसका ही छाया है मुझपे जूनून
उसके बिना कटता नहीं एक पल
एक लड़की...

{Written during few initial days at the School of Planning and Architecture, New Delhi in year 2008. Inspired and dedicated to a girl (anonymous to avoid trouble/recognition) of my class.}


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Poem Submitted: Wednesday, April 18, 2012

Poem Edited: Wednesday, April 18, 2012


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