लहू बोल रहा है Poem by Anjum Alinagari

लहू बोल रहा है

लहू बोल रहा है।।।।
न ज़ात न पात, इंसां के लिए।
इस प्यारे हिन्दुस्तां के लिए।
रहबर के लिए, राही के लिए।।
हाँ, वर्दी हर ख़ाकी के लिए।।
हर मर्ज़, हर एक नारी के लिए।
इस जीवन की गाड़ी के लिए।।।।।।।

लहू, बोल रहा है-----

हमें जिस्म के अंदर बहने दे।
नफ़रत से दूर ही रहने दे।
हर क़तरा है अनमोल मेरा।
ये दिल को, दिल से कहने दे।।।।।।।
इसी मिट्टी के हम आशिक़ हैं।
सब रंग से मेरे वाक़िफ हैं।
नस नस में अपना डेरा है।
पर घर मेरा अंधेरा है।

लहू, , , बोल रहा है।।।।

न मज़हब हम में है मौजुद।
हर अज़ो का, हमसे है वजुद।
हम खौल रहे हैं नफ़रत से।
ये कह देना हर ज़ुल्मत से।।।।
मेरा ज़्यादा, हिस्सा पानी है।।
पर जज़्बा हिन्दुस्तानी है।
हमें वख़्फ़ करो अपनो के लिए।
हर दर्द लिए सपनो के लिए।

लहू बोल रहा है।।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Wednesday, August 5, 2026
Topic(s) of this poem: hindi
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
लहू मतलब ख़ून, , , हर ख़ून का रंग लाल होता है। ख़ून पर लिखी गई कविता
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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