तेरा मेरा अज़ीम रिश्ता है Poem by Anjum Alinagari

तेरा मेरा अज़ीम रिश्ता है

तेरा मेरा अज़ीम रिश्ता है।
तू तो मेरे लिए फ़रिश्ता है।

तेरी आवाज़ दिल को भाती है।
मां भी सुनकर के मुस्कुराती है।

भाई तेरा ख़ुशी में झूमे है।
अपने होंठों से तुझको चूमें है।

जागती रात भर हैं अम्मी जान
हक़ अदा कर रही हैं फ़ूफ़ी जान।

तेरी आपी, तुझे खिलाती है।
माज़ कह कर तुझे बुलाती है।

रात में जागते जगाते हो।
तुम सितारे सा जगमगाते हो।

रब की नेमत हो, और अता हो तुम।
बाद मेरे, मेरा पता हो तुम।

इल्म, सेहत, ख़ुदा बुलंदी दे ।
दीन दुनिया में सरबलंदी दे।

अपनी पहचान ख़ुद बनाना तुम ।
मुश्किलों में भी मुस्कुराना तुम ।

ज़ुल्म से लड़ने वाला बनना है।
ज़िक्र ए रब करने वाला बनना है

राह ए हक़ से क़दम नहीं डोले।
कोई तुझको ग़लत नहीं बोले ।

तुम को वो इंक़लाब लाना है।
काम इंसानियत के आना है।

फूल को फूल बन के रहना है।
बाप का बेटे से ये कहना है।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Friday, July 24, 2026
Topic(s) of this poem: nazm,father,father and son
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
प्यारे बेटे माज़ हसन के लिए।
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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