किसी के भी ज़र पर नज़र न जमाएं। Poem by Anjum Alinagari

किसी के भी ज़र पर नज़र न जमाएं।

किसी के भी ज़र पर , नज़र न जमाएं।
किसी को डरा कर, कभी न कमाएं।

अगर चाहते हैं तरक़्क़ी हो मेरी
मुहब्बत से इल्मो हुनर आज़माएं।

सियासत में आने का मक़सद यही है,
जो वादा किया है, उसे हम निभाएं।।।

कोई राज़ अब राज़ रहता नहीं है,
है बेचैन दिल , राज़ किसको बताएं।

समझते हों जो आप की असलियत को,
उन्हें आप दुश्मन, न अपना बनाएं।।।

अगर बात करनी हो दिल खोल कर के
तो घर पर ज़रूर आप तशरीफ़ लाएंं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Monday, August 3, 2026
Topic(s) of this poem: hindi
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दूसरे के माल व दौलत पर नज़र जमाएं बैठे लोग कुछ कर नहीं पाते
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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