ज़मीन से जो जुड़े हुए थे, नहीं रहे Poem by Anjum Alinagari

ज़मीन से जो जुड़े हुए थे, नहीं रहे

ज़मीन से जो जुड़े हुए थे, नहीं रहे।
जो पैरों पे ख़ुद खड़े हुए थे, नहीं रहे।

पता है मुझ को, ख़बर है तुझको,
कि जिनसे ज़ालिम डरे हुए थे, नहीं रहे।

न लाइट थी , न था मोबाईल, चिराग़ था बस
जो लिखते पढ़ते चिराग़ में ख़ुद बड़े हुए थे, नहीं रहे।

बता रही है अभी की नफ़रत, बता रही है
जो प्यार दिल में भरे हुए थे, नहीं रहे।

© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Wednesday, July 1, 2026
Topic(s) of this poem: nazm,ghazal,urdu,hindi
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धीरे धीरे हक़ परस्त चले जा रहे हैं
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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