हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन । Poem by Anjum Alinagari

हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन ।

हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन।
हम निगहबान हैं, पासबाने वतन ।

फ़ख़्र है मुल्क मेरा ये आज़ाद है।
प्यारो उल्फ़त मुहब्बत से आबाद है।
इसकी आज़ादी की जब कहानी सुनी,
तब‌ से अब तक कहानी हमें याद है।
दर्द से है भरा, दास्ताने वतन।

तू हमारा है, हम हैं तुम्हारे वतन
हम खड़े हैं तुझे ‌ ये ‌ बताने वतन ।
हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन।

हम से ही रंगो बू, हम से ही साज़ है।
हम को अपने वतन पे बड़ा नाज़ है।
तुझ पे क़ुर्बान हो जाए, तन और धन
हम सभी के दिलों की ये आवाज़ है।

कह रहे हैं यही , मुहिब्बाने वतन
हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन।

हम ने क्या न किया है वतन के लिए।
ख़ून अपना दिया है वतन के लिए।
आख़री सांस तक बस कहूंगा यही।
अब तलक जो जिया हूं वतन के लिए।

कह रहे हैं ये सच आशिक़ाने वतन
हम हैं जाने वतन, हम जहाने वतन।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Tuesday, August 18, 2026
Topic(s) of this poem: hindi,patriotic
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देश भक्ति गीत।
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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