प्यार, मुहब्बत की पहचान ।
स्लम की बस्ती का इरफ़ान।
जिनको महलों से प्यारा है,
अपना टूटा हुआ मकान।
बता रहे हैं देश की हालत।
बता रहे हैं दिल की चाहत।
हम ग़रीब, मज़दूर किसान ।
मुल्क के असली निगहबान।
जिनकी वजह से जगमग करता।
आज है अपना हिंदुस्तान।।
पढ़े लिखे कम, ज्ञान है ज़्यादा।
जिनका जीवन बिल्कुल सादा।।
बोलने से, हक़ बात न डरते।
हक़ की ख़ातिर अक्सर लड़ते।।।
दर्द भरा , इज़हार हैं करते।
शे'र के साथ प्रियंबल पढ़ते।
दम है, इनकी बातों में
ये जगते हैं, रातों में।
दिनभर, दम भर काम हैं करते ।
कभी नहीं आराम हैं करते।
वो भारत के , साथ खड़े हैं।
जिनसे साहब, डरे डरे हैं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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