स्लम की बस्ती का इरफ़ान। Poem by Anjum Alinagari

स्लम की बस्ती का इरफ़ान।

प्यार, मुहब्बत की पहचान ।
स्लम की बस्ती का इरफ़ान।

जिनको महलों से प्यारा है,
अपना टूटा हुआ मकान।

बता रहे हैं देश की हालत।
बता रहे हैं दिल की चाहत।

हम ग़रीब, मज़दूर किसान ।
मुल्क के‌ असली निगहबान।

जिनकी वजह से जगमग करता।
आज है अपना हिंदुस्तान।।

पढ़े लिखे कम, ज्ञान है ज़्यादा।
जिनका जीवन बिल्कुल सादा।।

बोलने से, हक़ बात न डरते।
हक़ की ख़ातिर अक्सर लड़ते।।।

दर्द भरा , इज़हार हैं करते।
शे'र के साथ प्रियंबल पढ़ते।

दम है, इनकी बातों में
ये जगते हैं, रातों में।

दिनभर, दम भर काम हैं करते ।
कभी नहीं ‌ आराम हैं करते।

वो भारत के , साथ खड़े हैं।
जिनसे साहब, डरे डरे हैं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
इरफ़ान जो की दिल्ली के स्लम बस्ती में रहता है, जंतर-मंतर पर अनशन पर शामिल रहता। कुछ भी पढ़ा लिखा नहीं होने के बावजूद हक़ के लिए सड़कों पर उतर कर लड़ता है
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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