आवाज़ बन कर रहना, आवाज़ उठाना Poem by Anjum Alinagari

आवाज़ बन कर रहना, आवाज़ उठाना

आवाज़ बन कर रहना, आवाज़ उठाना।
तुम जा रहे हो, जाओ मगर, लौट कर आना।

जब भी लगे ख़तरा है बड़ा मुल्क के ऊपर,
जी जान लगा कर के तुम मुल्क बचाना।

हक़दार को तड़पाए नहीं, कोई हुकूमत,
चारों तरफ़ वतन में वो माहौल बनाना।

भुखा न कोई सोए, न भुख से रोए,
सेवा का, संस्कार का, वो फ़र्ज़ निभाना।

चाहत है नौजवानों की नफ़रत को मिटाकर,
हर सू हो जहां जाएं, मुहब्बत का ठिकाना।।

काफ़ी दिनों के बाद सही, दिल ने कहा है,
वो काम करो, याद रखे सारा ज़माना।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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