गांव क्या‌ डूबा, डूबा शहर है Poem by Anjum Alinagari

गांव क्या‌ डूबा, डूबा शहर है

गांव क्या‌ डूबा , डूबा शहर है।
बाढ़ भी क़ुदरती, एक क़हर है।

सर से ऊपर बढ़े जैसे पानी,
फिर समझ लें कि ख़तरे का घर है।

जल्दबाजी करें, घर से निकलेंं,
क्योंकि घर डूब जाने का डर है।

उनके घर में, भी घुस आया पानी,
पास जिनके बहुत माल व ज़र है।

हर तरफ़ पानी, पानी है पानी,
ये कहानी , नज़र का सफ़र है।

सब के सब रोड पर आ चुके हैं,
बाढ़ का इतना ज़्यादा असर है।

वो तबाही, जो है बाढ़ लाती,
देख कर उसको, नीचा ये सर है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
बाढ़ के विनाशकारी होने के बारे में बताती है
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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