हिंदू मुस्लिम का अब खेल। जो खेले जाए जेल। Poem by Anjum Alinagari

हिंदू मुस्लिम का अब खेल। जो खेले जाए जेल।

हिंदू मुस्लिम का अब खेल।
जो भी खेले जाए जेल ।

मांग ये सबसे ऊपर हो।
सबक़ सिखाओ नफ़रत को।

मुद्दे पे अब लड़ने का।
नफ़रत से न डरने का।

जब भी मूंह को खोला कर।
मुल्क के हक़ में बोला कर।

दौर मुहब्बत का फिर ला।
काम ग़रीबों के तू आ।

ख़िदमत करना पेशा हो ।
भले न जेब में पैसा हो ।

सच का साथ निभाया कर।
सच्ची बात बताया कर ।

झूठ से नफ़रत करने का ।।
आपस में न लड़ने का।

सोंच समझ कर कदम बढ़ाओ।
मुल्क की ख़ातिर फ़र्ज़ निभाओ।

उम्मीदोंं की , नई किरण हो ।।
अपने वतन के तन मन धन हो ।।।

दशा दिशा के रखवाले हो ।।।
तुम्ही तो एक हिम्मतवाले हो ।।

युवा देश के, मेरे जवान ।
तुम से है ये हिंदुस्तान।।।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Thursday, August 6, 2026
Topic(s) of this poem: education,hindi,teacher
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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