हिंदू मुस्लिम का अब खेल।
जो भी खेले जाए जेल ।
मांग ये सबसे ऊपर हो।
सबक़ सिखाओ नफ़रत को।
मुद्दे पे अब लड़ने का।
नफ़रत से न डरने का।
जब भी मूंह को खोला कर।
मुल्क के हक़ में बोला कर।
दौर मुहब्बत का फिर ला।
काम ग़रीबों के तू आ।
ख़िदमत करना पेशा हो ।
भले न जेब में पैसा हो ।
सच का साथ निभाया कर।
सच्ची बात बताया कर ।
झूठ से नफ़रत करने का ।।
आपस में न लड़ने का।
सोंच समझ कर कदम बढ़ाओ।
मुल्क की ख़ातिर फ़र्ज़ निभाओ।
उम्मीदोंं की , नई किरण हो ।।
अपने वतन के तन मन धन हो ।।।
दशा दिशा के रखवाले हो ।।।
तुम्ही तो एक हिम्मतवाले हो ।।
युवा देश के, मेरे जवान ।
तुम से है ये हिंदुस्तान।।।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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